कोरोना काल के दो साल बाद आखिर बच्चों का परीक्षा का इंतजार खत्म हुआ और उन्होंने तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल होकर पर्चे हल किए। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष केवल ग्राम रंथभंवर में पूरी परीक्षा में अब तक एक ही केस बना है। पिछले दो सालों से कोरोना काल के चलते बच्चे परीक्षा नहीं दे पाए थे। एक वर्ष सभी को प्रमोट किया गया तो एक साल बच्चों ने ऑनलाईन परीक्षा दी। इस वर्ष कोरोना का कहर कम हुआ और मरीजों की संख्या में भी कमी आई। जिसके चलते प्रदेश सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय लिया।

स्कूलों में अध्ययन हुआ और बच्चों को परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला। दो सालों बाद ऑफलाईन हुई परीक्षा को लेकर बच्चों ने उत्साह के साथ परीक्षा दी। इसी का परिणाम है कि पूरे जिले में बनाए गए परीक्षा केंद्रों में से केवल रंथभंवर में ही एक केस बना। म.प्र. माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने दसवीं और बारहवीं की कापियों का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। पहले चरण में 28 फरवरी तक संपन्न हो चुकी परीक्षा की कापियां जांची जा रही हैं। दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में करीब 18 लाख विद्यार्थियों की एक करोड़ 30 लाख कापियों के मूल्यांकन के लिए 30 हजार शिक्षकों को लगाया गया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या बढाई थी:-

दो वर्ष की तरह यह साल भी आधा कोरोना की भेंट चढ़ चुका था। जिसके चलते विद्यार्थियों को चिंता सता रही थी कि वे तैयारी कैसे कर सकेंगे। लेकिन प्रदेश सरकार को भी बच्चों की यह परेशानी समझ आई। जिसके चलते शिक्षा विभाग ने प्रश्नों के पेटर्न में बदलाव किया और ज्यादा से ज्यादा वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को शामिल किया। नतीजन बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।  माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश ने 10वीं 12वीं बोर्ड परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है। इस सत्र में आयोजित होने वाली परीक्षा में अब 25 फीसदी की जगह 40 फीसदी प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप होंगे।

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10वीं-12वीं की परीक्षा में पूछे गए गलत प्रश्नों के मिलेंगे बोनस अंक

म.प्र. माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने दसवीं और बारहवीं की कापियों का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। पहले चरण में 28 फरवरी तक संपन्न हो चुकी परीक्षा की कापियां जांची जा रही हैं। इसमें कई विषयों में बोनस अंक देने की तैयारी चल रही है। खासतौर पर उन विषयों में बोनस अंक दिए जाएंगे, जिनमें गलत सवाल परीक्षा में पूछे गए थे। बता दें कि सबसे अधिक गलत सवाल दसवीं के गणित के पेपर में छह पूछे गए हैं।

जबकि बारहवीं के जीवविज्ञान, भौतिकी, रसायनशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन सहित अन्य दो विषयों में सवाल गलत थे। साथ ही मंडल ने कापियों की जांच आदर्श उत्तर के अनुसार करने की व्यवस्था बनाई है। मंडल ने इसके दिशा-निर्देश जारी है कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि मंडल की दसवीं व बारहवीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हुई हैं। दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में करीब 18 लाख विद्यार्थियों की एक करोड़ 30 लाख कापियों के मूल्यांकन के लिए 30 हजार शिक्षकों को लगाया गया है।

नए पैटर्न पर हो रही परीक्षा:- माशिमं इस साल नए पैटर्न पर परीक्षा आयोजित कर रहा है। साथ ही कई विषयों में 30 से 40 फीसद सिलेक्स कम कर दिए हैं।शशिकांत बनोट, सचिव, माशिम:-“जितने विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो गई है। उनका मूल्यांकन कार्य शुरू कर दिया है। उसके आदर्श उत्तर तैयार कराकर विशेषज्ञों से एनालिसिस कराते हैं। जितने विषयों में त्रुटि पाई गई है। उसमें विद्यार्थियों को बोनस अंक दिए जा रहे है।” इसके बावजूद कई विषयों में कटौती किए गए पाठ्यक्रम से सवाल पूछ लिए गए हैं। यही नहीं कई विषयों में सवाल गलत भी पूछे गए हैं। दसवीं-बारहवीं के कुछ प्रश्नपत्रों में इस बार भी गलतियां निकली हैं। इन प्रश्नों को जिन विद्यार्थियों ने हल करने का प्रयास किया होगा, उन्हें निर्धारित अंक प्रदान किए जाएंगे।

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